बिश्नोई पंथ • जीवन परिचय
गुरु जम्भेश्वर का जीवन परिचय
॥ जम्भ भक्ति ॥
गुरु जम्भेश्वर का जन्म विक्रम संवत 1508 (सन 1451) में जन्माष्टमी के दिन नागौर जिले के पीपासर गाँव में हुआ।
उनके पिता लोहटजी पंवार और माता हंसादेवी थीं। बचपन का नाम धनराज बताया जाता है। माता उन्हें श्रीकृष्ण का अवतार मानती थीं।
बालपन में वे बहुत कम बोलते थे और लंबे समय तक गायें चराते रहे। उनकी बाल लीलाओं की कई कथाएँ प्रसिद्ध हैं।
34 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी सारी संपत्ति दान कर दी और बीकानेर के समराथल धोरे पर चले गए।
सन 1485 में कार्तिक बदी अष्टमी को समराथल पर उन्होंने पाहल देकर बिश्नोई पंथ बनाया और 29 नियम बताए।
उनके मुख से निकले उपदेश शब्दवाणी कहलाते हैं। जम्भवाणी में उनके 120 शब्द संग्रहित हैं।
कवि वील्होजी के अनुसार सिकंदर लोदी, राव दूदा, राव जैतसी, राव सातल और महाराणा सांगा जैसे शासक उनकी शरण में आए।
लालसर में उन्होंने निर्वाण लिया और मुकाम (तालवा) में उनकी समाधि है, जहाँ फाल्गुन और आसोज की अमावस्या को मेला भरता है।
॥ जम्भ भक्ति ॥
जाम्भोजी के जीवन, धाम और ग्रंथों की पूरी जानकारी।
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