बिश्नोई पंथ • बाल लीला 1

पीपासर में जन्म का उत्सव

जाम्भोजी की बाल लीला, भाग 1

॥ जम्भ भक्ति ॥

१

सात वर्ष की बाल लीला

कथा के अनुसार जाम्भोजी ने सात वर्ष तक बाल लीलाएँ कीं। इन लीलाओं में बच्चों को अच्छे संस्कार देने की सीख छिपी है।

शब्दवाणी

घणा दिना का बड़ा न होयबा, बड़ा न लंबा पारूं

केवल उम्र या लंबाई से कोई बड़ा नहीं होता। बड़ा वह है जिसके कर्म अच्छे हैं।

२

बुढ़ापे में संतान

पीपासर के ठाकुर लोहटजी के घर बुढ़ापे में पुत्र हुआ तो लोग हैरान हुए। कुछ ने कहा, राजा दशरथ के भी तो बुढ़ापे में चार पुत्र हुए थे।

३

गाँव-गाँव से लोग

घर-घर से छोटे-बड़े सब लोहटजी के आँगन में जुटने लगे। सबको लगा कि कोई चमत्कारी बालक आया है।

४

लोहट और हंसा का आनंद

लोहटजी और हंसादेवी की खुशी का ठिकाना न था। वे आने वालों को खुले हाथ से बधाइयाँ बाँट रहे थे।

५

संतोष का अनुभव

बधाई लेने वाले नट, भाट, ब्राह्मण और नाई थोड़ा पाकर भी संतुष्ट थे। कथा कहती है, जहाँ भगवान आते हैं वहाँ तृष्णा नहीं रहती।

६

मंगल गीत

गाँव की बुज़ुर्ग और युवा स्त्रियाँ आँगन में गीत गा रही थीं: लोहट का लाला अजर-अमर रहे, यशस्वी हो।

सीख

बचपन के संस्कार

बालपन जीवन की पहली सीढ़ी है। अच्छे संस्कार बचपन में मिलें तो जीवन भर साथ रहते हैं।

॥ जम्भ भक्ति ॥

बाल लीला भाग 1 पढ़ें

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान की बाल लीला, विस्तार से।

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