मंत्र • अर्थ सहित

गायत्री मंत्र: अर्थ और जप का तरीका

वेदों का सबसे पवित्र मंत्र

॥ जम्भ भक्ति ॥

मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

ऋग्वेद का यह मंत्र सविता (सूर्य) देव की उपासना है और इसे वेदों की माता कहा जाता है।

१

भूर्भुवः स्वः

भूः पृथ्वी लोक, भुवः अंतरिक्ष और स्वः स्वर्ग लोक, यानी तीनों लोकों में व्याप्त परमात्मा।

२

तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य

उस प्रेरणा देने वाले सविता देव के श्रेष्ठ और पापनाशक तेज का...

३

धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

...हम ध्यान करते हैं। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सही मार्ग पर प्रेरित करे।

४

जप का सही समय

सूर्योदय से पहले, दोपहर और सूर्यास्त के समय, यानी तीनों संध्याओं में जप करना श्रेष्ठ माना जाता है।

५

जप के नियम

स्नान करके, पूर्व की ओर मुख करके रुद्राक्ष या तुलसी की माला से कम से कम 108 बार शांत मन से जप करें।

॥ जम्भ भक्ति ॥

गायत्री मंत्र पढ़ें

मंत्र, उसका अर्थ और महत्व, जम्भ भक्ति पर।

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