रमा एकादशी • 5 नवंबर

एकादशी माता की आरती

साल की हर एकादशी का नाम, एक आरती में

॥ जम्भ भक्ति ॥

पद १

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता। विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥

हे एकादशी माता, आपकी जय हो। विष्णु पूजा के साथ आपका व्रत रखने वाला शक्ति और मुक्ति पाता है।

पद २

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी। शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी को एकादशी माता प्रकट हुईं। शुक्ल पक्ष की मोक्षदा मुक्ति देने वाली है।

पद ३

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है। शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥

पौष मास में सफला और पुत्रदा एकादशी आती हैं, जो आनंद देने वाली हैं।

साल भर

24 एकादशी, एक आरती

आगे के पदों में माघ की षटतिला-जया, फाल्गुन की विजया-आमलकी, चैत्र की पापमोचनी-कामदा से लेकर साल की सभी एकादशियों के नाम आते हैं।

पद

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी। रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥

आश्विन शुक्ल की पापांकुशा पाप हरती है, और कार्तिक की रमा एकादशी बहुत सुख देने वाली है।

आज

5 नवंबर: रमा एकादशी

आज कार्तिक कृष्ण पक्ष की रमा एकादशी है। भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा करें, तुलसी दल चढ़ाएँ और शाम को यह आरती गाएँ।

पद

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया। पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥

कार्तिक शुक्ल की देवउठनी एकादशी (इस बार 20 नवंबर) दुखों का नाश करने वाली है।

अंतिम पद

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै। जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥

गुरदिता जी कहते हैं, जो भक्ति से यह आरती गाता है, उसे स्वर्ग में वास मिलता है।

॥ जम्भ भक्ति ॥

पूरी आरती पढ़ें

एकादशी माता की आरती, सभी पद एक साथ।

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