1 नवंबर • स्थापना दिवस
गुरु जम्भेश्वर का पावन आसन
॥ जम्भ भक्ति ॥
राजस्थान के बीकानेर ज़िले में मुकाम के पास रेत का ऊँचा धोरा, जिसे गुरु जम्भेश्वर का आसन माना जाता है।
1485 ईस्वी में मारवाड़ में भयंकर अकाल पड़ा। गुरु जम्भेश्वर ने समराथल पर लोगों की मदद की और उन्हें धर्म का मार्ग दिखाया।
कार्तिक कृष्ण अष्टमी को उन्होंने कलश स्थापित कर पाहल (अभिमंत्रित जल) दिया और 29 नियम बताए। यहीं से बिश्नोई पंथ बना।
समराथल पर गुरु जम्भेश्वर ने कई वर्षों तक उपदेश दिए। उनकी वाणी शब्दवाणी कहलाती है, जिसमें 120 शब्द हैं।
पास ही मुकाम (तालवा) में गुरु जम्भेश्वर की समाधि है, जहाँ फाल्गुन और आसोज की अमावस्या को बड़ा मेला लगता है।
॥ जम्भ भक्ति ॥
गुरु आसन समराथल की कथा, शब्दों सहित, जम्भ भक्ति पर।
jambhbhakti.com