अहोई अष्टमी • 1 नवंबर 2026

अहोई अष्टमी: संतान के लिए माँ का व्रत

कथा, पूजा विधि और तारों को अर्घ्य

॥ जम्भ भक्ति ॥

१

कब और क्यों

कार्तिक कृष्ण अष्टमी (इस बार 1 नवंबर) को माताएँ संतान की लंबी आयु और सुख के लिए व्रत रखती हैं।

२

अहोई माता का चित्र

दीवार पर गेरू से या कागज़ पर अहोई माता, सेह और उसके बच्चों का चित्र बनाएँ। सामने जल से भरा करवा रखें।

३

शाम की पूजा

रोली, चावल, दूध और मिठाई से पूजा करें, दीपक जलाएँ और अहोई माता की कथा सुनें।

कथा

साहूकार की पत्नी की भूल

दीपावली से पहले मिट्टी खोदते समय उससे अनजाने में सेह का बच्चा मर गया। साल भर में उसके सातों बेटे चल बसे।

कथा

पश्चाताप और माता की कृपा

बड़ी-बूढ़ी महिलाओं के कहने पर उसने अष्टमी का व्रत रखा और सेह के बच्चों का चित्र बनाकर क्षमा माँगी। माता की कृपा से उसे फिर सात पुत्र मिले।

४

तारों को अर्घ्य

शाम को तारे निकलने पर करवे के जल से अर्घ्य दें, फिर व्रत खोलें। कई घरों में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी है।

॥ जम्भ भक्ति ॥

पूरी व्रत कथा पढ़ें

अहोई अष्टमी की कथा, आरती और राधाकुण्ड से जुड़ी कथा, सब जम्भ भक्ति पर।

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