दिवाली की रात • मंत्र जप
दिवाली की रात मंत्र जप की विधि
॥ जम्भ भक्ति ॥
मंत्र
माँ महालक्ष्मी का सबसे सरल नाम-मंत्र। दिवाली की रात पूजा के बाद इसका जप किया जाता है।
भजन रूप
भगवान विष्णु की प्रिया महालक्ष्मी को बार-बार नमस्कार।
भजन रूप
धन देने वाली और पूरे विश्व की माता को बार-बार नमस्कार।
दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन के बाद, या हर शुक्रवार को सुबह स्नान के बाद।
साफ आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। सामने घी का दीपक और माँ लक्ष्मी का चित्र रखें।
कमलगट्टे या स्फटिक की माला से 108 बार जप करें। माला न हो तो 11 या 21 बार भी श्रद्धा से बोल सकते हैं।
जप के बाद लक्ष्मी जी की आरती करें, खील-बताशे का भोग लगाएँ और घर के सभी सदस्यों को प्रसाद दें।
मान्यता है कि सच्चे मन और साफ घर में ही लक्ष्मी टिकती हैं। जप के साथ मीठा बोलना और ईमानदारी भी ज़रूरी है।
॥ जम्भ भक्ति ॥
मंत्र और जाप का भजन रूप, जम्भ भक्ति पर।
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