बिश्नोई पंथ • बाल लीला 2
जाम्भोजी की बाल लीला, भाग 2
॥ जम्भ भक्ति ॥
एक दिन लोहटजी के घर डमरू लिए, जटाधारी एक योगी आए। माता हंसा ने आदर से स्वागत किया और भोजन-दूध ग्रहण करने का आग्रह किया।
हंसा ने पूछा, कहीं आप स्वयं विष्णु, ब्रह्मा या शिव तो योगी बनकर मेरे घर नहीं आए?
योगी रूप में शिवजी बोले: तुम्हारे घर तीनों देव हैं। यह बालक स्वयं विष्णु है, लोहटजी ब्रह्मा रूप हैं और मैं शिव हूँ।
नवजात शिशु कुछ खाता-पीता नहीं था, इसलिए परिवार चिंतित था। माँ चाहती थी कि बेटा दूध-मक्खन खाए और जल्दी बड़ा हो।
योगी ने हँसकर कहा: द्वापर में कृष्ण बनकर इन्होंने यशोदा और गोपियों का इतना माखन खाया कि इस जन्म में उपवास ही करेंगे।
हंसा ने पूछा, कलयुग में तो प्राण अन्न पर टिके हैं, मेरा बेटा बिना अन्न-जल कैसे जिएगा?
उत्तर
योगी बोले, ये तो सारे जगत के आधार हैं। इनका कोई दूसरा आधार नहीं, ये स्वयं अपने आधार हैं।
योगी ने कहा: ये बारह करोड़ बिछड़े जीवों को पार उतारने आए हैं। मोह छोड़कर ज्ञान की दृष्टि से देखोगी तो सच समझ आएगा।
॥ जम्भ भक्ति ॥
श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान की बाल लीला, विस्तार से।
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