दीपोत्सव 2026
धनतेरस से भाई दूज तक
॥ जम्भ भक्ति ॥
धन्वंतरि और कुबेर-लक्ष्मी की पूजा, नए बर्तन या धातु की खरीद और शाम को यम के नाम का दीपक।
छोटी दिवाली या रूप चौदस। सुबह उबटन लगाकर स्नान और शाम को घर के बाहर दीपक जलाने की परंपरा है।
कार्तिक अमावस्या की शाम प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजन, फिर पूरे घर में दीपदान।
गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजा, अन्नकूट का भोग और गौ सेवा।
बहनें भाई को तिलक कर भोजन कराती हैं। इसी दिन चित्रगुप्त पूजा भी होती है।
कुछ पंचांगों में नरक चतुर्दशी, गोवर्धन और भाई दूज की तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। अपने शहर का पंचांग ज़रूर देखें।
घर की सफाई, पूजा सामग्री, नए दीये, रंगोली के रंग और लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति पहले से ले आएँ।
दीपक अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। मान्यता है कि साफ और रोशन घर में माँ लक्ष्मी का वास होता है।
॥ जम्भ भक्ति ॥
मुहूर्त, सामग्री लिस्ट, मंत्र और आरती एक जगह।
jambhbhakti.com