बिश्नोई पंथ • अवतार कथा
प्रह्लाद को दिया वचन
॥ जम्भ भक्ति ॥
अवतार का अर्थ है प्रकट होना। जब धर्म की हानि होती है और पाप बढ़ता है, तब भगवान विष्णु धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं।
शब्दवाणी
जाम्भोजी कहते हैं, नारायण के नौ अवतार भी हमारे ही रूप हैं।
श्रीकृष्ण के बाद मरुभूमि में धर्म जगाने वाला कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ। यहाँ के लोग सदा उपेक्षित रहे।
लोग पवित्रता, सत्य और जीव दया भूल चुके थे। झगड़े, चोरी, निंदा, नशा और देवताओं के नाम पर जीव हिंसा आम थी।
भगवान नृसिंह ने भक्त प्रह्लाद को वचन दिया था कि वे उनके बिछड़े हुए जीवों का उद्धार करेंगे।
मान्यता है कि सतयुग में पाँच करोड़, त्रेता में सात करोड़ और द्वापर में नौ करोड़ जीव पार हुए। बारह करोड़ अभी शेष थे।
उन्हीं शेष जीवों के उद्धार के लिए भगवान धर्म रूपी नौका लेकर मरुभूमि में जाम्भोजी के रूप में प्रकट हुए।
शब्दवाणी
जाम्भोजी कहते हैं, मैं खोजने वाला हूँ। जीव जहाँ भी छिपे हों, मैं उन्हें मूल से खोज लेता हूँ।
॥ जम्भ भक्ति ॥
जम्भेश्वर भगवान के अवतार के निमित्त कारण, भाग 1।
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