कार्तिक मास • स्तोत्र

दामोदराष्टकम्

जब यशोदा ने बाँधा नन्हे कान्हा को

॥ जम्भ भक्ति ॥

जानिए

कार्तिक को दामोदर मास क्यों

कार्तिक मास को दामोदर मास भी कहते हैं। इस महीने में दीपदान के साथ सत्यव्रत मुनि द्वारा रचित दामोदराष्टकम् गाने की परंपरा है।

कथा

माखन और टूटी मटकी

एक दिन नन्हे कृष्ण ने दही की मटकी तोड़ दी और माखन बाँटने लगे। माँ यशोदा छड़ी लेकर आईं तो वे डरकर भागे।

कथा

हर बार दो अंगुल छोटी रस्सी

यशोदा उन्हें ओखल से बाँधने लगीं, पर हर रस्सी दो अंगुल छोटी पड़ जाती। माँ की थकान देखकर कान्हा स्वयं बँध गए। दाम यानी रस्सी, उदर यानी पेट: इसलिए दामोदर।

श्लोक १

नमामीश्वरं सच्चिदानन्दरूपं लसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानम्

मैं उन सच्चिदानंद ईश्वर को नमन करता हूँ, जिनके कानों में कुंडल झिलमिलाते हैं और जो गोकुल में शोभित हैं।

श्लोक १

यशोदाभियोलूखलाद्धावमानं परामृष्टमत्यन्ततो द्रुत्य गोप्या

जो माँ यशोदा के डर से ओखल से कूदकर भाग रहे हैं, और जिन्हें यशोदा ने दौड़कर पीछे से पकड़ लिया।

श्लोक ४

इदं ते वपुर्नाथ गोपालबालं सदा मे मनस्याविरास्तां किमन्यैः

हे नाथ, मुझे मोक्ष भी नहीं चाहिए। बस आपका यह बाल-गोपाल रूप सदा मेरे मन में बसा रहे।

श्लोक ७

तथा प्रेमभक्तिं स्वकां मे प्रयच्छ

जैसे आपने कुबेर के पुत्रों नलकूबर और मणिग्रीव को मुक्त कर भक्ति दी, वैसे ही मुझे भी अपनी प्रेम-भक्ति दीजिए।

परंपरा

कैसे गाएँ

कार्तिक की शाम घी का दीपक लेकर भगवान के सामने दामोदराष्टकम् गाएँ और दीप दिखाएँ। पूरे महीने यह क्रम चलता है।

॥ जम्भ भक्ति ॥

पूरा दामोदराष्टकम् पढ़ें

आठों श्लोक संस्कृत में, जम्भ भक्ति पर।

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