मंत्र • अर्थ सहित
भगवान शिव का रक्षा मंत्र
॥ जम्भ भक्ति ॥
मंत्र
ऋग्वेद और यजुर्वेद में आया यह मंत्र भगवान शिव (त्र्यम्बक) को समर्पित है।
हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं...
...जो सुगंधित हैं और सबका पोषण कर बल बढ़ाने वाले हैं।
जैसे पकी हुई ककड़ी बेल के बंधन से अपने आप अलग हो जाती है...
...वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, पर अमृत (मोक्ष) से दूर न करें।
स्नान के बाद शिवलिंग या शिव चित्र के सामने बैठें और रुद्राक्ष की माला से 108 बार जप करें। सोमवार और प्रदोष विशेष माने जाते हैं।
॥ जम्भ भक्ति ॥
महामृत्युंजय मंत्र, अर्थ और महत्व, जम्भ भक्ति पर।
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