आरती • अर्थ सहित
दिवाली पूजा की आरती, हर पंक्ति का अर्थ
॥ जम्भ भक्ति ॥
पद १
हे माँ लक्ष्मी, आपकी जय हो। शिव, विष्णु और ब्रह्मा भी दिन-रात आपकी सेवा करते हैं।
पद २
आप ही उमा, रमा और ब्रह्माणी हैं, आप ही जगत की माता हैं। सूर्य-चंद्र आपका ध्यान करते हैं और नारद गुण गाते हैं।
पद ३
आप निर्मल दुर्गा रूप और सुख-संपत्ति देने वाली हैं। जो आपका ध्यान करता है, उसे ऋद्धि-सिद्धि और धन मिलता है।
पद ४
जिस घर में आप रहती हैं वहाँ सभी अच्छे गुण आते हैं, सब काम संभव हो जाते हैं और मन नहीं घबराता।
पद ५
आपके बिना न यज्ञ होते हैं, न किसी को वस्त्र मिलते हैं। खाने-पीने का सारा वैभव आपकी कृपा से ही है।
पद ६
जो भी महालक्ष्मी की यह आरती गाता है, उसके हृदय में आनंद भर जाता है और पाप दूर हो जाते हैं।
॥ जम्भ भक्ति ॥
दिवाली पूजा में गाने के लिए माँ लक्ष्मी की पूरी आरती।
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